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राकेश जैन
राकेश जैन, इंदौर के व्यापार सलाहकार, अपने कार्यालय में

इंदौर · व्यापार सलाहकार

हर धंधे का
एक मौसम होता है।

सवाल यह है कि आप किसमें हैं।

Four decades of running businesses in Indore. Now spent on yours.

30 मिनट · कोई शुल्क नहीं

  • 40+ वर्ष
  • पूर्व CEO, Prestige
  • IMA वक्ता
  • रोटेरियन
  • इंदौर

मेरा मानना

इंदौर के मालिक को सलाह की कमी नहीं है। उसे एक ऐसे आदमी की कमी है जिससे वह सच बोल सके।

चालीस साल मैंने इसी शहर में और इसी के आसपास काम किया है। खेती से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी चलाई, ज़मीन-जायदाद में रहा, होटल देखा, खेत देखे। कुछ में कमाया, कुछ में गँवाया।

इन सालों में एक बात बार-बार सामने आई। यहाँ का मालिक मेहनती है, हिसाब का पक्का है, और अपने काम को उससे बेहतर कोई नहीं जानता। जो उसके पास नहीं है, वह है एक ऐसा आदमी जिससे वह बिना डरे कह सके — मुझे समझ नहीं आ रहा।

बैंक से नहीं कह सकता, वरना लिमिट अटक जाएगी। स्टाफ़ से नहीं कह सकता, वरना भरोसा हिल जाएगा। घर पर नहीं कह सकता, वरना चिंता बढ़ जाएगी। और जो सलाहकार बाहर से आते हैं, वे स्लाइड दिखाते हैं, फ़ीस लेते हैं, और चले जाते हैं।

मैं कोच नहीं हूँ। मैंने कोई कोर्स नहीं बनाया। मैंने धंधा किया है और उसमें गिरा भी हूँ। अब जो सीखा है वह किसी और के काम आ जाए — मेरे लिए इतना काफ़ी है।

धंधे में सबसे महँगी चीज़ ग़लत फ़ैसला नहीं है। सबसे महँगी चीज़ है फ़ैसला न लेना।

किसके साथ

मैं किन मालिकों के साथ बैठता हूँ

मैं हर किसी के साथ काम नहीं करता। जिनके साथ करता हूँ, वे अक्सर इनमें से किसी एक जैसे होते हैं। अगर इनमें से कोई विवरण आपको अपना लगे, तो बात बन सकती है।

पीथमपुर

ऐंसिलरी यूनिट का मालिक

मशीन लगी है, ऑर्डर आते हैं, पर सब एक या दो बड़े ग्राहकों से। पेमेंट नब्बे दिन में आता है और कच्चा माल नक़द में जाता है। क्षमता आधी खाली पड़ी है, फिर भी नया काम लेने में डर लगता है — क्योंकि यह पक्का नहीं कि उस पर कमाई है भी या नहीं। दिन शॉप फ़्लोर पर निकल जाता है, और महीने के आख़िर में हिसाब देखकर सवाल उठता है कि इतनी मेहनत गई कहाँ।

सोया · नमकीन

प्रोसेसिंग यूनिट का मालिक

सीज़न में सब कुछ एक साथ चाहिए — माल, पैसा, मज़दूर, गोदाम। बाक़ी महीनों में यूनिट आधी चलती है। भाव ऊपर-नीचे होते रहते हैं और मुनाफ़ा भाव के साथ बदलता है, आपके काम के साथ नहीं। असली सवाल यह है कि आप कमोडिटी बेचते रहेंगे या अपना नाम बनाएँगे — और अगर नाम बनाना है, तो उसका पैसा कहाँ से आएगा।

सराफ़ा · मल्हारगंज

परिवार की पुरानी दुकान

दुकान पचास साल पुरानी है, ग्राहक नाम से जानते हैं। पर वही सामान अब ऑनलाइन सस्ता मिल रहा है और नया ग्राहक दुकान तक आता ही नहीं। घर के तीन लोग काम में हैं और तीनों का काम तय नहीं है। कोई हिसाब देखता है, कोई ख़रीदी, कोई कुछ नहीं — और फ़ैसला सब मिलकर लेते हैं, इसलिए फ़ैसला होता ही नहीं।

दूसरी पीढ़ी

काम सँभाल रहे बेटे या बेटी

पढ़ाई बाहर से की, दो-चार साल नौकरी भी की, अब घर का काम सँभालना है। आपको साफ़ दिख रहा है कि क्या बदलना चाहिए — पर स्टाफ़ पिताजी की सुनता है, और पिताजी को लगता है कि जो चला आ रहा है वह ठीक चल रहा है। दोनों अपनी जगह ग़लत नहीं हैं। बीच में एक ऐसा आदमी चाहिए जिसे दोनों सुनें।

तरीक़ा

चार मौसम

धंधा सीधी लकीर में ऊपर नहीं जाता। वह चक्र में चलता है, खेत की तरह। हर मौसम का अपना काम होता है, और गड़बड़ तब होती है जब कोई काटने के मौसम में बोने लगता है। पहली बातचीत में हम सिर्फ़ यह तय करते हैं कि आप इस वक़्त किस मौसम में हैं।

मौसम चुनिए

Sow · निदान और स्पष्टता

बोना

पहले यह साफ़ हो कि धंधा कमाता कहाँ से है, और पैसा जाता कहाँ है।

ज़्यादातर मालिक जिसे समस्या समझते हैं वह समस्या नहीं, लक्षण होता है। इस मौसम में हम कुछ नया शुरू नहीं करते। हम आपके नंबर, आपके ग्राहक और आपका समय — तीनों को अलग-अलग करके देखते हैं, और तय करते हैं कि अगले साल असल में करना क्या है।

इस मौसम की निशानी

  • बिक्री बढ़ रही है पर बैंक बैलेंस नहीं
  • यह पक्का नहीं कि कौन-सा काम कमाता है और कौन-सा नहीं
  • पूरा दिन आग बुझाने में निकल जाता है

साथ काम

साथ काम करने के तीन तरीक़े

तीनों अलग हैं और तीनों हर किसी के लिए नहीं हैं। हर तरीक़े के नीचे यह भी लिखा है कि वह किसके लिए नहीं है। वह हिस्सा पढ़कर ही तय कीजिए।

पहला क़दम

खुली बैठक

निःशुल्क या नाममात्र शुल्क

दो घंटे · इंदौर · साल में कुछ बार

एक कमरा, तीस-चालीस मालिक, दो घंटे। कोई बिक्री नहीं होती। एक विषय लिया जाता है — कैश फ़्लो, दाम तय करना, या परिवार और धंधे के बीच की सीमा — और उस पर खुलकर बात होती है। मुझे परखने का सबसे सस्ता तरीक़ा यही है।

यह किसके लिए है

  • जो पहले देखना-सुनना चाहते हैं
  • जिन्हें अभी सलाहकार नहीं, एक नज़रिया चाहिए

यह किसके लिए नहीं है

  • जिन्हें अपने धंधे की गोपनीय बात करनी है
  • जिन्हें आज ही कोई फ़ैसला लेना है
अगली बैठक की सूचना पाएँ

समूह

बैठक

जल्द शुरू

शुल्क तय किया जा रहा है

आठ से दस मालिक · महीने में एक बार · तीन घंटे

आठ से दस ग़ैर-प्रतिस्पर्धी मालिक, महीने में एक बार, तीन घंटे। हर बैठक में दो लोग अपनी असली समस्या रखते हैं और बाक़ी उस पर काम करते हैं। मैं बैठक चलाता हूँ, जवाब नहीं देता — जवाब कमरे से निकलते हैं। जो बात कमरे में होती है, कमरे में रहती है।

यह किसके लिए है

  • जिनका धंधा चल रहा है और कुछ साल पुराना है
  • जो साल भर की प्रतिबद्धता दे सकें
  • जो अपने नंबर और अपनी दिक़्क़त खुलकर रख सकें

यह किसके लिए नहीं है

  • जिन्हें सिर्फ़ सुनना है, बोलना नहीं
  • जो हर महीने तीन घंटे नहीं निकाल सकते
प्रतीक्षा सूची में नाम दें

एक-से-एक

व्यक्तिगत सलाह

शुल्क बातचीत के बाद

सीमित · शुरुआत एक पूरे दिन से

आपके साथ, आपके धंधे पर। शुरुआत एक पूरे दिन से होती है — यूनिट या दुकान पर, नंबरों के साथ। उसके बाद तय समय पर मुलाक़ात और बीच में फ़ोन। मैं आपकी तरफ़ से कोई काम नहीं करता; फ़ैसले आपके ही रहते हैं। साल में कुछ ही मालिकों के साथ यह संभव है।

यह किसके लिए है

  • जो अगले तीन साल का फ़ैसला लेने की स्थिति में हैं
  • जो अपने नंबर दिखाने को तैयार हैं

यह किसके लिए नहीं है

  • जिन्हें तुरंत पैसा या निवेशक चाहिए
  • जो चाहते हैं कि काम कोई और करके दे दे
निःशुल्क बातचीत बुक करें

मैं किसी बैंक, सीए, सॉफ़्टवेयर या सप्लायर से कमीशन नहीं लेता, और किसी धंधे में हिस्सेदारी नहीं रखता।

नतीजे

जिनके साथ काम हुआ

नीचे की हर बात असली मालिकों की है और उन्हीं की अनुमति से लगाई जाएगी। जब तक अनुमति नहीं मिलती, यह जगह ख़ाली रहेगी। बनाई हुई तारीफ़ यहाँ नहीं लगेगी।

यह हिस्सा अभी अधूरा है — सामग्री की पुष्टि बाक़ी है

TODO — असली ग्राहक का कथन, उनकी अनुमति के बाद। लिखित अनुमति के बिना नहीं लगाना।
TODO — नाम TODO — धंधे का नाम या प्रकार TODO — शहर
TODO — असली ग्राहक का कथन, उनकी अनुमति के बाद।
TODO — नाम TODO — धंधे का नाम या प्रकार TODO — शहर
TODO — असली ग्राहक का कथन, उनकी अनुमति के बाद।
TODO — नाम TODO — धंधे का नाम या प्रकार TODO — शहर

कुछ नतीजे

TODO
TODO — नतीजा, जैसे: नक़दी चक्र कितने दिन घटा
TODO
TODO — नतीजा, जैसे: मालिक का समय कितना बचा
TODO
TODO — नतीजा, जैसे: उत्तराधिकार कब तय हुआ

बातचीत

समय चुन लीजिए

तीस मिनट, फ़ोन या वीडियो पर। कोई शुल्क नहीं और कोई बाध्यता नहीं।

या सीधे फ़ोन कीजिए +91 99999 99999

सुनिए

हर हफ़्ते एक बात

छोटे वीडियो, हिंदी में, एक-एक विषय पर। और WhatsApp चैनल पर हफ़्ते में एक संदेश — इससे ज़्यादा नहीं।

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WhatsApp चैनल

हफ़्ते में एक संदेश। कोई फ़ॉरवर्ड नहीं, कोई विज्ञापन नहीं। जुड़ने पर आपका नंबर मुझे या किसी और सदस्य को नहीं दिखता — यह WhatsApp का नियम है।

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परिचय

मेरे बारे में

जन्म और पढ़ाई इंदौर में। काम की शुरुआत सत्तर के दशक के आख़िर में हुई, उस समय जब यहाँ का व्यापार मंडी और मिल के इर्द-गिर्द घूमता था।

कई साल Prestige में रहा और अंत में उसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना — खेती से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय कारोबार, मुख्यालय इंदौर में। उसके बाद अपने काम — ज़मीन-जायदाद, आतिथ्य और खेती। कुछ पुरस्कार मिले, कुछ नुक़सान भी हुए, और दोनों से सीखा।

आज इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन में बोलता हूँ, रोटरी में सक्रिय हूँ, और बाक़ी समय मालवा के मालिकों के साथ बैठता हूँ। यही सबसे अच्छा लगता है।

पूरी कहानी पढ़ें

सवाल-जवाब

जो अक्सर पूछा जाता है

यह कोचिंग है या कंसल्टिंग?

दोनों नहीं। कोच आपसे सवाल पूछता है और जवाब आपसे ही निकलवाता है। कंसल्टेंट रिपोर्ट बनाकर दे देता है। मैं वह आदमी हूँ जिसने यही काम ख़ुद किया है और जो आपको बता देगा कि इस मोड़ पर मैंने क्या किया था और उसमें क्या ग़लत निकला। फ़ैसला आपका ही रहता है।

पहली बातचीत में क्या होता है?

तीस मिनट। मैं तीन बातें पूछता हूँ — धंधा करते कितने साल हुए, इस वक़्त सबसे बड़ी अटकन क्या है, और वह अटकन हट जाए तो क्या बदल जाएगा। न कोई प्रस्तुति, न कोई फ़ॉर्म। बातचीत के अंत में मैं साफ़ बता देता हूँ कि मैं काम आ सकता हूँ या नहीं।

इसमें कितना समय देना पड़ेगा?

बैठक समूह में महीने के तीन घंटे। व्यक्तिगत सलाह में शुरुआत का एक पूरा दिन, फिर हर तिमाही आधा दिन और बीच में ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन। इससे कम में कुछ बदलता नहीं, और इससे ज़्यादा माँगने वाले पर एक बार शक कीजिए।

फ़ीस कितनी है?

खुली बैठक निःशुल्क या नाममात्र शुल्क पर होती है। बैठक समूह और व्यक्तिगत सलाह की फ़ीस तय की जा रही है और बातचीत में साफ़ बता दी जाती है। पहली बातचीत का कोई शुल्क नहीं है, और उसमें फ़ीस की बात तभी होती है जब आप पूछें।

क्या आप कमीशन या हिस्सेदारी लेते हैं?

नहीं। न कोई कमीशन, न किसी बैंक, सीए, सॉफ़्टवेयर कंपनी या सप्लायर से कोई साँठगाँठ। अगर मैं किसी का नाम सुझाता हूँ तो उससे मुझे कुछ नहीं मिलता। और मैं आपके धंधे में हिस्सेदारी नहीं लेता।

मेरा धंधा छोटा है, क्या तब भी बात हो सकती है?

हाँ। आकार से फ़र्क़ नहीं पड़ता। हाँ, अगर धंधा अभी शुरू ही हुआ है और पहला ग्राहक भी नहीं आया है, तो मैं शायद सही आदमी नहीं हूँ। मेरा काम चल रहे धंधों पर है।

क्या मेरी बात गोपनीय रहेगी?

हाँ। जो बात मुझे बताई जाती है वह मेरे पास रहती है। बैठक समूह में भी यह नियम पहले दिन से लागू होता है। ज़रूरत हो तो यह लिखित में भी दिया जा सकता है।

बातचीत हिंदी में होगी या अंग्रेज़ी में?

जिसमें आप सहज हों। ज़्यादातर बातचीत हिंदी में होती है।

आख़िर में

कोई पिच नहीं।

तीस मिनट। आप अपने धंधे की बात कहिए, मैं सुनूँगा, और जो दिखेगा वह बता दूँगा। उसके बाद आगे बढ़ना है या नहीं, यह आप तय कीजिए। बहुत लोगों के साथ मेरी एक ही बातचीत हुई है और वह भी काफ़ी रही।